मेहनत करोगे तो फल पाओगे - Mehant Karoge To Fal Paoge

बाईबल में कहा गया है। की वह जैसा बोता है। वह वैसा ही काटता है कहने का मतलब है की मेहनत करोगे तो फल  पाओगे ( Mehant Karoge To Fal Paoge ) लगभग यही बात धर्म कहता है। यही कर्म सिंद्धांत है। आम का वृक्ष लगाने पर कालांतर में Mango प्राप्त होंगे।

वट पेड़ लगाने पर छाया मिलेंगी लेकिन बबूल के बीज उगाएंगे तो कांटे हाथ लगे गे। कांटे ही पेरो में चुभेंगे, इसलिए जरुरी है। सही बीजारोपण करें।
मेहनत करोगे तो फल  पाओगे - Mehant Karoge To Fal Paoge

मेहनत करोगे तो फल पाओगे - Mehant Karoge To Fal Paoge 


आज के वैज्ञानिक युग में किसान खेतो से बुआई करने से पूर्व जिस प्रकार मिटटी को भली - भांति तैयार करके उसमें उच्च कोटि के बीज बोता है। उसी प्रकार व्यक्ति ( Mehant Karoge To Fal Paoge ) भी मनरूपी ज़मीन को निर्मल करके उसमें Positive दृष्टिकोण से उत्पन्न अच्छे विचारो के बीज बोये।

ये बीज हो सम्पूर्ण Family की सुख - समृद्धि परस्पर प्रेम, उत्तम स्वास्थ्य, आरोग्य तथा दीर्घायु की कामना के, समस्त पड़ोसियो, मित्रों तथा स्वजनों की सुख समृद्धि परस्पर - प्रेम, उत्तम स्वास्थ्य, आरोग्य तथा दीर्घायु की कामना करें। "Mehant Karoge To Fal Paoge "

पुरे गाँव, कस्बे, नगर तथा सम्पूर्ण राष्ट्र व विश्व के सभी लोगो की सुख समृद्धि, परस्पर - प्रेम, उत्तम स्वास्थ्य, आरोग्य तथा दीर्घायु की कामना करें। [ मेहनत करोगे तो फल पाओगे Mehant Karoge To Fal Paoge ] 

मेहनत करोगे तो फल पाओगे - Mehant Karoge To Fal Paoge 

मन हर क्षण असख्य भाव उत्पन्न होते है। अनेक इच्छाए पैदा होती है। न तो सभी भाव स्पष्ट हो पाते है। और न तो सभी इच्छाए स्पष्ट और पूर्ण हो पाती है। इच्छाए परस्पर एक - दूसरी इच्छा को बीच में ही समाप्त कर देती है।

अथवा मूल स्वरूप को विकृत कर देती है। न जानें कितनी इच्छाएं, कितनी सात्विक इच्छाएं

 स्पष्ट ही नहीं हो पाती है। पूर्ण कैसे हो ? सबसे पहले सात्विक इच्छा का चयन करना है। मन में उठने वाले भवार्णव में से उत्कृष्ट भाव का चयन करना है।

शांत - स्थिर अवस्था में बैठकर भावों का विश्लेषण करें तो सात्विक या उपयोगी भाव अथवा इच्छाएं स्पष्ट हो जाती है।

यदि इच्छाओं के जंजाल में से उपयोगी इच्छा या सात्विक भाव का चयन नहीं हो पाता तो मनुष्य अपनी वृद्धि और विवेक का सहारा ले। हम सब जानते है। की क्या अच्छा है। और क्या अच्छा नहीं है।



मेहनत करोगे तो फल  पाओगे - Mehant Karoge To Fal Paoge 

मेहनत करोगे तो फल  पाओगे - Mehant Karoge To Fal Paoge 

जिन्हे हम संकल्प कहते है।, वे यही से पारंभ होते है। इच्छा की तीव्रता या किसी कार्य को करने की दृढ़ इच्छा ही सकल्प है। किसी भाव का चुनाव कर लेना इच्छा की तीव्रता के फलस्वरूप ही संभव है। मुझे यह कार्य करना ही है।

मुझे यह प्राप्त करना ही है, मुझे अच्छा इंसान बनना ही है, मुझे इन गुणों का विकास करना ही है, मुझे अच्छा इंसान बनना ही है। यह सब मेरे ही भाव है जो चुनाव और इच्छा की तीव्रता या दृढ़ता के कारण संकल्प का रूप ले लेते है।

संकल्प का अर्थ ही है। कि हमने इच्छा का चुनाव या उद्देश्य को स्पष्ट कर लिया है। अब उसे पाना शेष है। जिसके लिए प्रयास करना है।

मेहनत करोगे तो फल  पाओगे - Mehant Karoge To Fal Paoge 

  इसे हम गोल सैटिंग भी कह सकते है। किसी काम को सोच - समझ कर करना। करने वाले वास्तव में हम नहीं है। हम तो मात्रा सोच सकते है। विचार कर सकते है। विचार के साथ ही त्रियांवयन की प्रिक्रिया प्रारम्भ हो जाती है।

हम विचार को नियंत्रित कर सकते है। उसे प्रभावी बना सकते है। Negative भाव को हटाकर उसके स्थान पर Positive भाव ला सकते है, तथा भावों का पोषण कर इच्छित वस्तु को प्राप्त कर सकते है।

कहा गया है। की परुषार्थ के बिना कार्य सिद्ध नहीं हो सकता लेकिन परुषार्थ भी हम किसी इच्छा के वशीभूत होकर ही तो करते है। इच्छा के बिना परुषार्थ भी हम किसी इच्छा के वशीभूत होकर ही तो करते है।

 इच्छा के बिना परुषार्थ भी असभंव है। इच्छाएं कीजिये तभी कुछ प्राप्त कर पाएंगे मेहनत करोगे तो फल पाओगे ( Mehant Karoge To Fal Paoge ) यही शिदत नियम है।

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Final Word :-


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